हीर और रांझा की प्रेम कहानी भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे प्रसिद्ध और दिल को छू लेने वाली प्रेम कहानियों में से एक है। यह कहानी पंजाब की लोककथा है, जिसे कवि वारिस शाह ने अपने ग्रंथ "हीर" में अमर कर दिया।
कहानी का सारांश:
हीर सियाल नाम की एक खूबसूरत और बुद्धिमान लड़की थी, जो पंजाब के झंग जिले के एक अमीर परिवार से थी। रांझा (धीदो रांझा) तख्त हजारा का एक सुंदर और संगीत प्रेमी युवक था। वह अपनी बांसुरी की मधुर धुनों के लिए जाना जाता था।
जब रांझा अपने घर से झगड़कर हीर के गांव पहुंचा, तो वह हीर के घर में चरवाहे का काम करने लगा। हीर और रांझा एक-दूसरे को देखकर तुरंत प्यार में पड़ गए। रांझा की बांसुरी की धुनों ने हीर का दिल जीत लिया।
प्रेम और बाधाएं:
दोनों का प्रेम गहरा था, लेकिन हीर के चाचा कैदो को यह रिश्ता पसंद नहीं था। उसने हीर के परिवार को उकसाकर उसकी शादी जबरदस्ती एक अमीर व्यक्ति से करवा दी। रांझा इस अन्याय से टूट गया और एक योगी बन गया। वह हीर के पास लौटने के लिए संघर्ष करता रहा।
दुखद अंत:
कई कठिनाइयों के बाद, हीर और रांझा एक बार फिर मिलते हैं। हीर के माता-पिता शादी के लिए राजी हो जाते हैं, लेकिन शादी से पहले ही कैदो हीर को जहर दे देता है। हीर की मौत से रांझा टूट जाता है और वह भी उसके पास दम तोड़ देता है।
प्यार की मिसाल:
हीर और रांझा की कहानी सच्चे प्रेम, बलिदान और सामाजिक बंधनों के खिलाफ संघर्ष की प्रतीक है। यह प्रेम कहानी आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है और पंजाब की संस्कृति का अहम हिस्सा है।

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