नटवरलाल का असली नाम मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव था। वह बिहार के सीवान जिले के बंगरा गांव का रहने वाला था। नटवरलाल का नाम भारतीय इतिहास में एक ऐसे ठग के रूप में दर्ज है, जिसने अपनी चतुराई और चालाकी से देश की सबसे बड़ी हस्तियों और संस्थानों को धोखा दिया।
शुरुआत
नटवरलाल बचपन से ही बेहद होशियार और चालाक था। उसने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वकालत की पढ़ाई भी की, लेकिन जल्द ही उसने देखा कि अपनी बुद्धिमत्ता का उपयोग करके वह पैसे कमाने का दूसरा तरीका भी अपना सकता है। उसने नकली हस्ताक्षर बनाने और पहचान पत्र तैयार करने की कला में महारत हासिल कर ली।
पहला बड़ा धोखा
नटवरलाल ने ठगी की शुरुआत छोटे-मोटे धोखों से की, लेकिन जल्दी ही उसने बड़े स्तर पर काम करना शुरू कर दिया। वह इतने सफाई से काम करता था कि किसी को भी शक नहीं होता। उसने देश के बड़े-बड़े उद्योगपतियों और नेताओं को चूना लगाया। उसकी सबसे चर्चित ठगी वह थी जब उसने ताजमहल, लाल किला, राष्ट्रपति भवन, और संसद भवन जैसे राष्ट्रीय धरोहरों को 'बेच' दिया।
कैसे करता था ठगी?
नटवरलाल का तरीका बेहद अनोखा और अद्भुत था। वह अमीर व्यापारियों और उद्योगपतियों से मिलता, उनके विश्वास में आता, और फिर उन्हें धोखा देता। वह नकली दस्तावेज़ और फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल करता। एक बार उसने किसी विदेशी व्यापारी को ताजमहल बेचने के लिए राजी कर लिया।
पकड़ा जाना और भागना
नटवरलाल को कई बार गिरफ्तार किया गया, लेकिन वह हर बार जेल से भागने में कामयाब हो जाता था। कहते हैं कि उसने पुलिस की आंखों में धूल झोंकते हुए 8 बार जेल से भागने का कारनामा किया। एक बार तो उसने पुलिसवालों को मिठाई में नशीला पदार्थ खिलाकर भागने की योजना बनाई।
आखिरी दिन
नटवरलाल का आखिरी भागना भी रहस्यमय था। 1996 में जब उसे कानपुर जेल ले जाया जा रहा था, वह फिर से भाग निकला। इसके बाद उसका कोई पता नहीं चला। कुछ लोग कहते हैं कि वह मर चुका है, लेकिन उसकी मौत की कोई ठोस पुष्टि नहीं है।
मशहूर ठग, लेकिन चमत्कारी व्यक्तित्व
नटवरलाल को भले ही ठग माना जाता है, लेकिन लोग उसे एक चमत्कारी और बुद्धिमान व्यक्ति के रूप में भी देखते हैं। उसकी कहानियां भारतीय लोककथाओं में जीवित हैं और आज भी उसे एक अद्वितीय ठग के रूप में याद किया जाता है।
निष्कर्ष
नटवरलाल की कहानी यह सिखाती है कि बुद्धिमत्ता और चालाकी का उपयोग यदि सही दिशा में किया जाए, तो यह समाज के लिए फायदेमंद हो सकता है। लेकिन यदि इसे गलत दिशा में ले जाया जाए, तो यह नुकसानदायक साबित हो सकता है। नटवरलाल का जीवन एक रहस्य है, जो भारत के इतिहास में हमेशा दिलचस्प बना रहेगा।

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