जूरी के दो बैल: हीरा और मोती (प्रेमचंद की कहानी पर आधारित)
गांव के एक छोटे से कोने में एक किसान, जूरी, अपने खेतों में मेहनत कर के जीवन यापन करता था। जूरी के पास कुछ ही चीजें थीं जो उसे बेहद प्रिय थीं—उसका खेत, उसका छोटा सा घर और उसके दो बैल, हीरा और मोती। ये दोनों बैल न सिर्फ उसकी खेती का आधार थे, बल्कि उसके जीवन के अभिन्न अंग भी थे।
हीरा और मोती एक-दूसरे के साथ गहरे मित्र जैसे थे। जहां हीरा गंभीर और शांत स्वभाव का था, वहीं मोती थोड़ा चंचल और शरारती था। दोनों एक ही जुए में बंधे रहते और खेत में जूरी का सहारा बनते।
बैल और जूरी का प्रेम
जूरी अपने बैलों को केवल पशु नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा मानता था। वह उनकी देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ता। सुबह-सुबह उन्हें हरे-भरे चारे और साफ पानी से नवाजता और रात में उनके लिए आरामदायक स्थान तैयार करता। हीरा और मोती भी जूरी से इतना लगाव रखते थे कि जूरी की पुकार पर तुरंत दौड़ पड़ते।
परेशानी की शुरुआत
एक दिन जूरी को अचानक आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। वह अपनी फसल बेचने के बावजूद गांव के साहूकार के कर्ज को चुका नहीं पा रहा था। साहूकार ने उसे चेतावनी दी कि अगर वह जल्द ही कर्ज नहीं चुकाता, तो उसके बैल नीलाम कर दिए जाएंगे।
जूरी के लिए यह खबर दुखद थी। वह हीरा और मोती को खोने की कल्पना भी नहीं कर सकता था। उसने गांव के लोगों से मदद मांगी, लेकिन उसकी हालत ऐसी थी कि कोई उसकी सहायता नहीं कर सका।
नीलामी और बैलों का बिछड़ना
आखिरकार वह दिन आया जब साहूकार ने जूरी के बैलों को अपने कब्जे में ले लिया। जूरी के दिल पर यह चोट गहरी थी, लेकिन वह मजबूर था। साहूकार ने बैलों को नीलामी में बेच दिया। हीरा और मोती अलग-अलग खरीदारों के पास चले गए।
हीरा को एक व्यापारी ने खरीदा, जो उससे गाड़ी खिंचवाने का काम लेता था। मोती को एक लकड़हारे ने खरीदा, जो उसे भारी लकड़ी खींचने के काम में लगाता। दोनों बैल अपने नए मालिकों के साथ खुश नहीं थे। उनका मन हमेशा जूरी और अपने साथी के पास ही रहता था।
बैलों का मिलन
एक दिन, हीरा और मोती ने तय किया कि वे अपने नए मालिकों के अत्याचार को और सहन नहीं करेंगे। दोनों ने अपने-अपने जुए तोड़े और जंगल की ओर भाग निकले। भागते हुए उनकी किस्मत ने उनका साथ दिया और दोनों जंगल के एक मोड़ पर मिल गए।
जैसे ही दोनों ने एक-दूसरे को देखा, उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने अपने गले से गले मिलाया और जोर-जोर से रंभाने लगे। अब उनके मन में एक ही ख्याल था—अपने पुराने मालिक जूरी के पास वापस लौटने का।
वापसी की राह
जंगल के रास्तों और कठिनाइयों को पार करते हुए हीरा और मोती ने अपनी बुद्धिमानी और दोस्ती के बल पर गांव का रास्ता ढूंढ लिया। वे कई दिन बिना चारे और पानी के रहे, लेकिन उनके मन में जूरी के प्रति प्रेम उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा।
जूरी का सुखद आश्चर्य
एक दिन जब जूरी अपने खेत में उदास बैठा था, तो उसने देखा कि दो आकृतियां उसकी ओर बढ़ रही हैं। जैसे ही वे करीब आए, जूरी को अपने आंखों पर विश्वास नहीं हुआ। हीरा और मोती उसके सामने खड़े थे।
जूरी की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उसने दौड़कर दोनों को गले लगा लिया। वह उनकी दुर्दशा देखकर रो पड़ा और मन ही मन उन्हें वचन दिया कि अब कभी उन्हें किसी से अलग नहीं होने देगा।
खुशहाल अंत
हीरा और मोती फिर से जूरी के खेतों में लौट आए। जूरी ने अपने दोस्तों और गांव वालों की मदद से अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया। हीरा और मोती अब पहले से भी ज्यादा खुश और संतुष्ट थे।
इस तरह, जूरी, हीरा, और मोती की यह कहानी केवल इंसान और पशु के रिश्ते को नहीं दर्शाती, बल्कि यह सिखाती है कि प्रेम, मित्रता और वफादारी सभी कठिनाइयों को पार कर सकती है।
“सच्चा प्रेम और वफादारी ही जीवन की असली पूंजी है।”

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